Indira Gandhi Nahar Pariyojana : राजस्थान की जीवनरेखा

Indira Gandhi Nahar Pariyojana Rajasthan

परिचय

राजस्थान, जिसे “थार के मरुस्थल” की भूमि कहा जाता है, वर्षों तक पानी की कमी से जूझता रहा है। लेकिन  Indira Gandhi Nahar Pariyojana (IGNP) ने इस रेगिस्तानी राज्य के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर सूखे को हराया है। यह परियोजना न केवल राजस्थान की कृषि और अर्थव्यवस्था को बदल रही है, बल्कि लाखों लोगों को पीने का पानी और रोजगार भी दे रही है। आइए, इस महत्वाकांक्षी योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 Indira Gandhi Nahar Pariyojana क्या है?

 Indira Gandhi Nahar Pariyojana, जिसे मूल रूप से “राजस्थान नहर परियोजना” कहा जाता था, भारत की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य पंजाब के हरिके बैराज से सतलज और व्यास नदियों का पानी राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुँचाना है। 1960 में शुरू हुई इस परियोजना का नाम भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के नाम पर रखा गया।

मुख्य विशेषताएँ:

  • नहर की कुल लंबाई: 9,000 किलोमीटर से अधिक (मुख्य नहर + शाखाएँ)।
  • लाभान्वित क्षेत्र: हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, और जोधपुर जैसे 8 जिले।
  • सिंचाई क्षमता: 19.63 लाख हेक्टेयर भूमि।

योजना का शुभारंभ: कब और कैसे शुरू हुआ?

इस परियोजना की नींव 31 मार्च, 1958 को रखी गई थी, लेकिन नहर निर्माण का काम 1960 से शुरू हुआ। पहले चरण में हरिके बैराज से हनुमानगढ़ तक मुख्य नहर बनाई गई, जबकि दूसरे चरण (1980 के बाद) में नहर को जैसलमेर और बाड़मेर तक विस्तारित किया गया।

समयरेखा:

  • 1958: परियोजना को मंजूरी।
  • 1960: नहर निर्माण शुरू।
  • 1984: परियोजना का नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना किया गया।
  • 1990 के दशक: दूसरे चरण का पूरा होना।

योजना के मुख्य उद्देश्य

इस परियोजना को शुरू करने के पीछे कुछ बड़े लक्ष्य थे:

  1. सिंचाई सुविधा: रेगिस्तानी क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि बढ़ाना।
  2. पेयजल आपूर्ति: गाँवों और शहरों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  3. रोजगार सृजन: नहर निर्माण और कृषि से लोगों को आजीविका देना।
  4. पर्यावरण संतुलन: हरित क्षेत्र बढ़ाकर मरुस्थलीकरण रोकना।

योजना से मिलने वाले लाभ

इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने राजस्थान के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है:

1. कृषि क्रांति

  • पहले बंजर पड़ी जमीन पर अब गेहूँ, कपास, सरसों, और बाजरा की फसलें उगाई जाती हैं।
  • किसानों की आय में 3-4 गुना वृद्धि हुई है।

2. पेयजल की उपलब्धता

  • जैसलमेर और बीकानेर जैसे इलाकों में पीने के पानी का संकट कम हुआ है।
  • 1,000 से अधिक गाँवों को नहर से जोड़ा गया है।

3. रोजगार के अवसर

  • नहर के रखरखाव, कृषि, और पर्यटन से लाखों लोगों को रोजगार मिला है।

4. पर्यावरणीय सुधार

  • नहर क्षेत्र में हरियाली बढ़ने से वन्यजीवों को नया आवास मिला है।

योजना का लाभ कैसे उठाएँ?

अगर आप इस परियोजना से जुड़े लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:

  1. पात्रता जाँचें: परियोजना क्षेत्र (8 जिलों) के निवासी होना जरूरी है।
  2. आवेदन प्रक्रिया:
  • संबंधित जिले के सिंचाई विभाग से संपर्क करें।
  • जमीन के कागजात और आधार कार्ड की कॉपी जमा करें।
  1. सरकारी पोर्टल: राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर अप्लाई कर सकते हैं।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाएँ

आज, यह परियोजना राजस्थान की 40% से अधिक सिंचाई की जरूरत पूरी करती है। सरकार अब स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट और सोलर एनर्जी से नहरों को संचालित करने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही, नहर क्षेत्र में एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना है।

चुनौतियाँ और समाधान

हालाँकि इस परियोजना ने कई समस्याएँ दूर की हैं, लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी बने हुए हैं:

  • जल प्रबंधन: कुछ इलाकों में पानी की बर्बादी या नमकीन होने की समस्या।
  • समाधान: ड्रिप इरिगेशन और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

निष्कर्ष

 Indira Gandhi Nahar Pariyojana न सिर्फ राजस्थान, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। इसने साबित किया है कि सही योजना और मेहनत से रेगिस्तान को भी हरा-भरा बनाया जा सकता है। अगर आप भी इस परियोजना क्षेत्र में रहते हैं, तो इसका लाभ उठाकर अपनी आय और जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं।

3 thoughts on “Indira Gandhi Nahar Pariyojana : राजस्थान की जीवनरेखा”

Leave a Comment