Rajasthan Gram Vikas Adhikari Recruitment 2025 Notification Out: Apply Online, Exam Date, Vacancies, Eligibility, Syllabus & Preparation Tips
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) जिसे पहले राजस्थान अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) के नाम से जाना जाता था, Rajasthan Gram Vikas Adhikari Recruitment 2025 भर्ती अधिसूचना जारी करेगा। यह ग्राम विकास अधिकारी के लिए है। उम्मीदवार इस लेख में आगे सभी महत्वपूर्ण तिथियां, आवेदन कैसे करें, तैयारी के टिप्स और भर्ती से संबंधित सभी विवरण देख सकते हैं। वर्ष 2021 में, बोर्ड ने Gram Vikas Adhikari के पद के लिए 3896 रिक्तियां जारी कीं। नीचे दिए गए लेख में VDO भर्ती प्रक्रिया के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़ें।
Table of Contents
Rajasthan Gram Vikas Adhikari Vacancy 2025 Notification overview

Rajasthan Gram Vikas Adhikari की भूमिका
राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) एक सम्मानजनक और महत्वपूर्ण नौकरी है। यह पद RAS और PSI की तरह ही चुनौतीपूर्ण है, और कई छात्रों के लिए यह एक सपना होता है। इस नौकरी को पाने के लिए एक कठिन परीक्षा की आवश्यकता होती है, इसलिए VDO की भूमिका और सैलरी को लेकर अभ्यर्थियों में जिज्ञासा बनी रहती है।
Rajasthan Gram Vikas Adhikari (VDO) भर्ती 2024
इच्छुक उम्मीदवार राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (आरएसएमएसएसबी) की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से वीडीओ पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।
Category | Details |
State | Rajasthan |
Post Name | Village Development Officer (VDO) |
Organizing Body | RSMSSB, Jaipur |
Eligibility Criteria | Graduate Degree, Devanagari Script Proficiency, Computer Proficiency |
Selection Process | Written Examination & Document Verification |
Official Website | RSMSSB Website |
Rajasthan Gram Vikas Adhikari की सैलरी
राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी के पद के लिए 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मैट्रिक्स लेवल 6 है। इसके तहत न्यूनतम ग्रेड वेतन ₹24,300 है। नियुक्त उम्मीदवारों को 2 साल की प्रोबेशन अवधि के दौरान सीमित पारिश्रमिक मिलता है, जिसमें अन्य भत्ते शामिल नहीं होते। प्रोबेशन पीरियड के बाद भत्ते जैसे यात्रा भत्ता, मकान किराया भत्ता, महंगाई भत्ता आदि मिलते हैं।
विवरण | रुपये |
पे बैंड | ₹5200-20250 |
ग्रेड पे | ₹5200 |
बेसिक पे | ₹20800 |
DA (डियरनेस अलाउंस) | ₹2496 |
HRA (मकान किराया भत्ता) | ₹1600 |
हार्ड ड्यूटी अलाउंस | ₹1500 |
नेट पे | ₹26400 |
NPS (नेशनल पेंशन स्कीम) | ₹2080 |
कुल पे | ₹24380 |
Rajasthan Gram Vikas Adhikari (VDO) का जॉब प्रोफाइल
- ग्राम प्रधान: गांव की समस्याओं की पहचान और VDO को रिपोर्ट करना।
- कार्यक्रमों का क्रियान्वयन: राज्य और केंद्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का सफल कार्यान्वयन।
- सामुदायिक विकास: गांवों में सामुदायिक और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना।
- स्वच्छता और जल सुरक्षा: गांवों की स्वच्छता और जल सुरक्षा की जिम्मेदारी।
- विकास कार्यक्रमों का लाभ: सभी गांवों को विकास कार्यक्रमों से लाभान्वित करना।

Rajasthan Gram Vikas Adhikari आवेदन शुल्क:
वर्ग | शुल्क |
सामान्य वर्ग और क्रीमीलेयर पिछड़ा वर्ग | 450 |
नॉन-क्रीमीलेयर पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग | 350 |
विशेष योग्यजन और SC/ST के अभ्यर्थी | 250 |
2.50 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवार के अभ्यर्थी | 250 |
Rajasthan Gram Vikas Adhikari पात्रता मानदंड
- शैक्षणिक योग्यता: मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री।
- कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी: देवनागरी लिपि की जानकारी और कंप्यूटर ज्ञान।
- उम्र सीमा: न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष।
राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी के लिए राजस्थान CET ग्रेजुएट में पास होना जरूरी है I जो भी विद्यार्थी CET ग्रेजुएट में क्वालीफाई होगा वही ग्राम विकास अधिकारी का फॉर्म अप्लाई कर सकता है I
Rajasthan Gram Vikas Adhikari आवश्यक प्रमाणपत्र:
- DOEACC द्वारा “O” लेवल या उच्च स्तर सर्टिफिकेट
- या COPA/DPCS कोर्स प्रमाण पत्र
- या कंप्यूटर साइंस/कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा
- या RS-CIT कोर्स प्रमाण पत्र
Rajasthan Gram Vikas Adhikari (VDO) चयन प्रक्रिया
- लिखित परीक्षा:
- मोड: ऑफलाइन
- समय: 2 घंटे (120 मिनट)
- प्रश्नों की संख्या: 120
- कुल अंक: 100
- प्रश्न प्रकार: ऑब्जेक्टिव
- नकारात्मक अंकन: गलत उत्तर पर 1/3 अंक की कटौती
Rajasthan Gram Vikas Adhikari परीक्षा का सिलेबस
पाठ्यक्रम विषय | विवरण |
सामयिकी | राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख वर्तमान सरकारी विषय, विभिन्न कार्यक्रम और खेल |
भूगोल और प्राकृतिक संसाधन | विश्व की विस्तृत भौतिक विशेषताएँ, महत्वपूर्ण स्थान, पर्वत और महासागर भारत की पारिस्थितिकी और वन्य जीवन राजस्थान का प्राकृतिक भूगोल राजस्थान की जलवायु, वनस्पति एवं मृदा क्षेत्र राजस्थान में विस्तृत भौतिक क्षेत्रफल, जनसंख्या, बेरोजगारी, गरीबी, सूखा राजस्थान में अकाल और मरुस्थलीकरण की समस्याएँ राजस्थान के प्राकृतिक संसाधन: खान एवं खनिज, वन, भूमि एवं जल, पशु संसाधन राजस्थान में वन्यजीव एवं संरक्षण |
इतिहास और संस्कृति | प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक इतिहास लोक नृत्य, रंगमंच, गीत वास्तुकला साहित्य साहित्यिक आंदोलन |
भारत और राजस्थान के विशेष संदर्भ में कृषि एवं आर्थिक विकास | राजस्थान की खाद्य एवं वाणिज्यिक फसलें राजस्थान के कृषि आधारित उद्योग राजस्थान में प्रमुख सिंचाई एवं नदी घाटी परियोजनाएँ राजस्थान में रेगिस्तानी और बंजर भूमि के विकास के लिए परियोजनाएं राजस्थान में प्रमुख उद्योग राजस्थान में जनजातियाँ और उनकी अर्थव्यवस्था |
सामान्य मानसिक क्षमता | वर्णमाला ब्लड रिलेशन पंचांग कारण अौर प्रभाव युक्तिवाक्य समानता |
तर्क और विश्लेषणात्मक योग्यता | कोडिंग और डिकोडिंग गणितीय संक्रियाएँ रिश्तों पंचांग घड़ी जुम्बलिंग वेन आरेख डेटा व्याख्या समानताएं और असमानताएं वर्णमाला और संख्या श्रृंखला |
गणित, हिंदी और अंग्रेजी | अंग्रेज़ी Grammar (Noun) Grammar (Pronoun) Grammar (Subject -Verb -Agreement) Grammar (Tense) Grammar (Adjective) Grammar (Articles) हिंदी व्याकरण (संज्ञा) व्याकरण (सर्वनाम) व्याकरण (विषय – क्रिया – सहमति) व्याकरण (काल) व्याकरण (विशेषण) व्याकरण (लेख अंकगणित आयु गणना प्राथमिक सांख्यिकी एलसीएम एचसीएफ क्षेत्रमिति बोडमास अनुपात और समानुपात समय और कार्य प्रतिशत बीजगणित चक्रवृद्धि ब्याज ज्यामिति और त्रिकोणमिति |
कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान | माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस संगणक संजाल कंप्यूटर बुनियादी बातें इनपुट और आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर के घटक |
Rajasthan Gram Vikas Adhikari के लिए आवेदन कैसे करें:
- वेबसाइट पर जाएं: RSMSSB की वेबसाइट
- पंजीकरण करें: नए उम्मीदवार के रूप में पंजीकरण करें और लॉगिन आईडी प्राप्त करें।
- आवेदन फॉर्म भरें: व्यक्तिगत जानकारी और शैक्षणिक विवरण भरें।
- दस्तावेज़ अपलोड करें: स्कैन की गई फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें।
- फीस का भुगतान करें: ऑनलाइन माध्यम से आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
- फॉर्म सबमिट करें: फॉर्म सबमिट करें और उसकी प्रति डाउनलोड करें।
निष्कर्ष
हमें उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा। अगर आपके कोई प्रश्न हैं, तो कमेंट करके पूछें |
1. राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया क्या है?
राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती 2025 के लिए आवेदन ऑनलाइन मोड के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट राजस्थान पंचायती राज विभाग पर जाकर निर्देशों का पालन करें। आवेदन फॉर्म भरते समय शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, और आवश्यक दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड, फोटो) को तैयार रखें। आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड से किया जा सकता है।
2. राजस्थान VDO भर्ती 2025 के लिए योग्यता मानदंड क्या हैं?
राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी पद के लिए उम्मीदवारों को निम्नलिखित योग्यताएँ पूरी करनी होंगी:
शैक्षणिक योग्यता: स्नातक (किसी भी स्ट्रीम में) किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से।
आयु सीमा: न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष (आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को छूट)।
निवास: उम्मीदवार को राजस्थान का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
कंप्यूटर ज्ञान: बेसिक कंप्यूटर स्किल्स (MS Office, इंटरनेट) आवश्यक।
3. राजस्थान VDO भर्ती परीक्षा 2025 की तैयारी कैसे करें?
राजस्थान VDO परीक्षा 2025 की तैयारी के लिए निम्न टिप्स फॉलो करें:
सिलेबस समझें: मुख्य विषयों में सामान्य ज्ञान (राजस्थान विशेष), गणित, हिंदी, तर्कशक्ति, और कंप्यूटर ज्ञान शामिल हैं।
पिछले वर्ष के पेपर: पैटर्न समझने के लिए पुराने प्रश्न पत्र हल करें।
मॉक टेस्ट: ऑनलाइन मॉक टेस्ट से समय प्रबंधन का अभ्यास करें।
समाचार अपडेट: राजस्थान सरकार की नवीनतम योजनाओं और अधिसूचनाओं को फॉलो करें।
यह भी पढ़ें
“गाँव की धरती पर एक विकास अधिकारी की जीत: संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी”
Title: “गाँव की धरती पर एक विकास अधिकारी की जीत: संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी”
प्रस्तावना
राजस्थान के एक दूरस्थ गाँव नीमदड़ा में धूप की तपिश और रेत के टीलों के बीच बसा यह गाँव सदियों से विकास के नाम पर केवल सरकारी फाइलों तक सीमित था। यहाँ के लोगों के लिए “सड़क”, “बिजली”, और “शिक्षा” जैसे शब्द सपने से ज्यादा कुछ नहीं थे। लेकिन एक दिन, इसी गाँव में एक युवा ग्राम विकास अधिकारी (VDO) की नियुक्ति हुई, जिसने न केवल इन सपनों को सच किया, बल्कि यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत से कोई भी मुश्किल असंभव नहीं होती। यह कहानी है अर्जुन सिंह की, जो एक VDO बनकर अपने ही गाँव के लिए मिसाल बना।
अध्याय 1: वापसी की शुरुआत
अर्जुन सिंह का जन्म नीमदड़ा में ही हुआ था। पिता एक छोटे-से खेत में मजदूरी करते थे, और माँ गाँव के स्कूल में चपरासी। गरीबी में पले-बढ़े अर्जुन ने बचपन से ही देखा था कि कैसे बिना सिंचाई के खेत सूख जाते हैं, कैसे बीमार बच्चों को इलाज के लिए 30 किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है, और कैसे लड़कियों की शादी पढ़ाई से पहले हो जाती है। लेकिन अर्जुन के पिता ने उसे एक ही सीख दी: “पढ़ाई ही वह हथियार है जो तुम्हें इन हालात से लड़ना सिखाएगी।”
अर्जुन ने दिन-रात मेहनत की और राजस्थान सरकार की VDO भर्ती परीक्षा पास कर ली। जब उसे अपने ही गाँव का VDO नियुक्त किया गया, तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। लेकिन गाँव वालों ने उसके स्वागत में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। एक बुजुर्ग ने कहा, “ये नौकरशाही वाले लोग आते हैं, कुछ फाइलें भरकर चले जाते हैं… हमारे गाँव का कुछ नहीं हो सकता।”
अध्याय 2: पहली चुनौती: विश्वास जीतना
अर्जुन ने शुरुआत गाँव की बैठकों से की। पहली बैठक में सिर्फ पाँच लोग आए। उनमें से एक युवक ने व्यंग्य किया, “साहब, आपको तनख्वाह मिल जाएगी, हमें क्या मिलेगा?” अर्जुन ने हार नहीं मानी। उसने गाँव की हर गली में घूमकर लोगों से बात की। उसे पता चला कि गाँव की सबसे बड़ी समस्या है पानी। कुएँ सूख चुके थे, और महिलाओं को पानी लाने के लिए 4 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था।
अर्जुन ने सरकार की जल संरक्षण योजना के तहत गाँव में तालाब बनवाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन गाँव के सरपंच ने विरोध किया: “यहाँ की जमीन पर तालाब बनाने से मेरे खेत का रास्ता बंद हो जाएगा!” अर्जुन समझ गया कि विकास के रास्ते में सिर्फ संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि मानसिकता भी बाधा है।
उसने गाँव के युवाओं को साथ लिया और श्रमदान का आह्वान किया। पहले दिन सिर्फ 10 लोग आए, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई। तालाब का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन एक रात कुछ अज्ञात लोगों ने उसमें मिट्टी डालकर काम रुकवा दिया। अर्जुन को पता चला कि यह सरपंच का षड्यंत्र था। उसने पुलिस में शिकायत की और सबूतों के आधार पर सरपंच को हटवा दिया।
6 महीने बाद…
तालाब बनकर तैयार हुआ। पहली बारिश में यह लबालब भर गया। गाँव वालों ने अर्जुन के सामने माथा टेका: “तुम सच्चे विकास अधिकारी हो।”
अध्याय 3: शिक्षा की लौ जलाना
तालाब के बाद अर्जुन ने गाँव के स्कूल पर ध्यान दिया। स्कूल की इमारत जर्जर थी, और शिक्षक महीने में एक बार आते थे। बच्चों के पास न किताबें थीं, न उम्मीद। अर्जुन ने साक्षरता अभियान चलाया। उसने गाँव की युवतियों को शिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षित किया और डिजिटल क्लासरूम के लिए सरकारी फंड जुटाया।
एक घटना ने उसे झकझोर दिया। 12 साल की राधा, जो स्कूल आती थी, की शादी तय हो गई। अर्जुन ने उसके पिता से बात की: “चाचा, राधा पढ़कर नर्स बन सकती है। उसकी जिंदगी बदल दो।” लेकिन पिता ने जवाब दिया: “हम गरीब हैं, शादी ही उसकी नियति है।”
अर्जुन ने राधा को अपने घर बुलाया और उसे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उसने गाँव की महिलाओं को इकट्ठा किया और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत जागरूकता शिविर लगाया। धीरे-धीरे, 5 परिवारों ने अपनी बेटियों की शादी टाल दी। आज राधा नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है और गाँव की लड़कियों के लिए प्रेरणा बनी है।
अध्याय 4: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
अर्जुन जानता था कि सिर्फ सुविधाएँ देने से गाँव विकसित नहीं होगा। उसने स्वयं सहायता समूह बनाए। महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प, और ऑर्गेनिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। गाँव की मंजू देवी ने अपने समूह के साथ नीम के साबुन बनाना शुरू किया, जो आज शहरों में भी बिकते हैं।
लेकिन चुनौतियाँ कम नहीं थीं। एक बार जब समूह को ऑर्डर मिला, तो कच्चा माल चोरी हो गया। अर्जुन ने गाँव वालों को समझाया: “अगर हम एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करेंगे, तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएँगे।” उसने CCTV कैमरे लगवाए और सामूहिक फंड बनाया। आज नीमदड़ा के उत्पादों की मांग पूरे जिले में है।
अध्याय 5: आपदा और एकता की परीक्षा
सब कुछ अच्छा चल रहा था कि एक रात भयंकर बारिश हुई। गाँव का तालाब उफनाया, और कई घरों को नुकसान पहुँचा। अर्जुन ने तुरंत आपदा प्रबंधन टीम को सक्रिय किया। उसने युवाओं के साथ मिलकर बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया।
लेकिन असली संघर्ष तब शुरू हुआ जब सरकारी अधिकारियों ने राहत राशि देने में देरी की। अर्जुन ने सोशल मीडिया पर गाँव की तस्वीरें वायरल कीं और प्रशासन पर दबाव बनाया। 48 घंटे के भीतर, राशन और कंबल पहुँच गए। गाँव वालों ने उसकी सूझबूझ की तारीफ की: “तुम्हारे बिना हम टूट जाते।”
उपसंहार: एक नया सवेरा
5 साल बाद…
आज नीमदड़ा सिर्फ एक गाँव नहीं, बल्कि विकास की मिसाल है। यहाँ हर घर में शुद्ध पानी पहुँचता है, स्कूल में 100% नामांकन है, और महिलाएँ अपने व्यवसाय चलाती हैं। अर्जुन अब भी VDO है, लेकिन गाँव वाले उसे “अर्जुन भाई” कहते हैं।
एक दिन एक पत्रकार ने उससे पूछा: “इतनी सफलता का रहस्य क्या है?”
अर्जुन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया: “विकास कागजों पर नहीं, दिलों में होता है। जब आप लोगों की आशाओं को अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, तो हर चुनौती रास्ता बन जाएगी।”
प्रेरणा का सार
अर्जुन की कहानी सिखाती है कि:
- ईमानदारी और धैर्य से हर लक्ष्य पाया जा सकता है।
- समुदाय की भागीदारी के बिना विकास अधूरा है।
- शिक्षा और स्वावलंबन ही गरीबी से मुक्ति का रास्ता है।
आज भी अर्जुन गाँव की गलियों में घूमता है, नई योजनाएँ बनाता है, और यह साबित करता है कि एक व्यक्ति का जज्बा पूरे समाज की तकदीर बदल सकता है।
~ कहानी का अंत ~
जब तक एक भी बच्चा अशिक्षित है, एक महिला असशक्त है, और एक किसान बर्बाद है… तब तक विकास का ढोंग है, सच्चाई नहीं।
संघर्ष वह पाठशाला है जहाँ इंसान ‘असंभव’ शब्द को जलाकर ‘मैं कर सकता हूँ’ की मशाल जलाता है।
गाँव की मिट्टी में वो ताकत है जो सोने को भी मिट्टी कर देती है… बस उसे जगाने वाले हाथ चाहिए।
तूफान से लड़कर ही नाविक महान बनते हैं |
THANK YOU .